नई दिल्ली।जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी के हालिया बयान पर सियासी और सामाजिक हलकों में विवाद तेज हो गया है। बांग्लादेश में सनातनी अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा को लेकर दिए गए मदनी के बयान पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक तुषारकान्त हिन्दुस्थानी ने तीखा पलटवार करते हुए इसे खतरनाक, भ्रामक और कट्टर सोच को बढ़ावा देने वाला”करार दिया है।
तुषारकान्त हिन्दुस्थानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
हिंसा के लिए ‘वजह’ तलाशना मानवता के विरुद्ध अपराध को जायज़ ठहराने की कोशिश है। किसी मासूम की हत्या, मंदिरों का अपमान या महिलाओं पर अत्याचार की कोई भी वजह नहीं हो सकती।
वजह’ शब्द ही सबसे बड़ा खतरा
उन्होंने कहा कि मदनी साहब के बयान में प्रयुक्त वजह’ शब्द एक ऐसी सोच को जन्म देता है, जिसके सहारे कट्टरपंथी हर जघन्य अपराध के लिए तर्क गढ़ते हैं।
अगर हिंसा को कारणों की चादर ओढ़ा दी जाए, तो फिर आतंक, दंगे और नरसंहार को भी सही ठहराया जाने लगेगा — और यही सबसे बड़ा खतरा है, उन्होंने कहा
चयनात्मक संवेदना पर सीधा हमला
तुषारकान्त हिन्दुस्थानी ने आरोप लगाया कि कुछ मजहबी नेता चयनात्मक संवेदना का पाखंड कर रहे हैं।उन्होंने कहा,भारत में किसी भी लिंचिंग की घटना निंदनीय है और उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों पर चुप्पी या उसे ‘प्रतिक्रिया’ कहना दोहरे मापदंड को उजागर करता है।”
उन्होंने साफ कहा कि अपराध का मूल्यांकन मजहब से नहीं, कृत्य से होना चाहिए। यही सच्चा भारतीय दृष्टिकोण है।
स्पष्ट सिद्धांत: ‘No Cow Lynching, No Man Lynching
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि भारत की आत्मा सह-अस्तित्व में बसती है।
हम न गौ-हत्या के समर्थक हैं और न भीड़ द्वारा किसी इंसान की हत्या के। ‘No Cow Lynching, No Man Lynching’ ही सभ्य समाज का रास्ता है,”उन्होंने कहा।
उन्होंने जोड़ा कि गौ-वंश करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्र है और उसका अपमान भारतीय संस्कृति पर हमला है, जबकि भीड़ हिंसा कानून और संविधान दोनों का अपमान है।
अरबी पहचान’ थोपने का आरोप
तुषारकान्त हिन्दुस्थानी ने मदनी साहब जैसे नेताओं पर भारतीय मुसलमानों को उनकी जड़ों से काटने का आरोप लगाते हुए कहा कि,मजहब बदलने से पूर्वज नहीं बदलते। भारतीय मुसलमान इसी धरती की उपज हैं, उनका डीएनए, भाषा और संस्कृति भारतीय है।”
उन्होंने कहा कि भारतीय मुस्लिम समाज को **अरबी कट्टरपंथ से खुद को अलग कर भारतीय राष्ट्रवाद के साथ खड़ा होना होगा।
भारत को फतवों नहीं, एकता की जरूरत
अपने बयान के अंत में तुषारकान्त हिन्दुस्थानी ने कहा,आज भारत को विभाजनकारी बयानों की नहीं, बल्कि एकता, संविधान और राष्ट्रीय स्वाभिमान की जरूरत है। भारत बचेगा, तभी सबका भविष्य सुरक्षित रहेगा।”

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